महंगाई से राहत(सम्पादकीय)

 क्लू टाइम्स, सुरेन्द्र कुमार गुप्ता 9837117141

(सम्पादकीय)

महंगाई से राहत

यह जगजाहिर है कि पिछले करीब ढाई-तीन साल के दौरान आम लोगों के लिए महंगाई कैसी समस्या बन चुकी है। आय के मुकाबले बाजार में न केवल आम उपयोग के, बल्कि जीवन के लिए जरूरी चीजों की कीमतें भी जिस स्तर पर बनी हुई थीं, उससे लोगों की परेशानी बढ़ी। हालांकि इस बीच सरकार ने लगातार ऐसे प्रयास किए, जिससे जरूरत की वस्तुओं के मूल्य कुछ स्थिर हो सकें। लेकिन बाजार की अपनी गति रही और महंगाई की चुनौती बनी रही।

महंगाई से राहत
काफी समय बाद अब इस मोर्चे पर साधारण लोगों के लिए यह राहत की खबर है कि खुदरा महंगाई दर पिछले एक साल में सबसे नीचे पहुंच गई है। दरअसल, बीते साल नवंबर के मुकाबले दिसंबर में खुदरा महंगाई दर में आई कमी ने एक बार फिर यह उम्मीद पैदा की है कि अगर यह स्थिति बनी रहती है तो देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ जाएगी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2022 में खुदरा महंगाई दर जहां 5.88 फीसद थी, वह दिसंबर में यह 5.72 फीसद दर्ज की गई। हो सकता है कि आंकड़ों के लिहाज से इसे कोई बड़ा फेरबदल नहीं माना जाए, लेकिन कई बार बाजार में जरूरी चीजों की कीमतों में आई कुछ कमी साधारण लोगों के लिए किसी उम्मीद कम नहीं होती।

बाजार में जरूरी चीजों के खुदरा मूल्यों में आई गिरावट को जहां देश में एक बड़ी समस्या से राहत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं इसकी अहमियत इस रूप में भी दर्ज की जा रही है कि जिस दौर में समूची दुनिया महंगाई से उपजी समस्याओं का सामना कर रही है, वैसे में भारत ने इस मोर्चे पर उभरी मुश्किलों को कुछ कम करने में कामयाबी हासिल की है। गौरतलब है कि खुले बाजार में खुदरा महंगाई दर के आकलन के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया जाता है, जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाओं के इस्तेमाल को कसौटी माना जाता है।

इसमें ग्रामीण क्षेत्र के लिए चार सौ अड़तालीस और शहरी क्षेत्रों के लिए चार सौ साठ वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया गया है। यों खुले बाजार में ऐसी तमाम वस्तुएं होती हैं, जिनकी कीमतों तक लोगों की पहुंच उसकी खरीदारी को तय करती है। लेकिन मुख्य रूप से रोजमर्रा की जरूरी और खासतौर पर खाने-पीने की चीजों के दाम से महंगाई की तीव्रता दर्ज की जाती है।

यह छिपा नहीं है कि पिछले काफी समय से सब्जियों के ऊंचे दाम ने लोगों की थाली को कुछ हद तक खाली रखना शुरू कर दिया था। अब इस मौसम में सब्जियों के साथ-साथ कुछ अन्य खाद्यान्नों की कीमत कम होने से महंगाई की चुनौती कमजोर पड़ती दिख रही है। दरअसल, खरीफ फसलों की कटाई नवंबर तक पूरी हो जाती है और उनके बाजार में आने से इस मामले में मदद मिलती है। यों सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को खुदरा महंगाई को दो फीसद के उतार-चढ़ाव के साथ चार फीसद पर बनाए रखने का लक्ष्य दिया हुआ है। लेकिन जरूरी वस्तुओं की कीमतें लोगों को तब सताने लगती हैं जब कम या ठहरी हुई आय की वजह से उनकी क्रयशक्ति कम हो जाती है।

सभी जानते हैं कि कोरोना महामारी के दौर में पूर्णबंदी से लेकर कई मोर्चों पर कैसे विपरीत हालात पैदा हुए थे। अब राहत की बात है कि महामारी के काबू में आने के साथ-साथ अमूमन सभी क्षेत्र सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सुधार के दौर में महंगाई से राहत मिलेगी और आम लोगों की आमदनी की तस्वीर भी सुधरेगी।