डीयू : मुक्त शिक्षा विद्यालय में छह नए पाठ्यक्रम

क्लू टाइम्स, सुरेन्द्र कुमार गुप्ता 9837117141

डीयू : मुक्त शिक्षा विद्यालय में छह नए पाठ्यक्रम
कुलपति योगेश सिंह ने बताया कि 28 साल बाद एसओएल में छह नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए शुरू किए जा रहे ये नए पाठ्यक्रम रोजगार-उन्मुख और पेशेवर पाठ्यक्रम आधारित होंगे। हर साल लगभग साढ़े पांच लाख विद्यार्थी एसओएल में प्रवेश लेते हैइन नए पाठ्यक्रमों के बाद विद्यार्थियों की संख्या में और इजाफा होगा। एमबीए को छोड़कर बाकी पांच नए पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या असीमित है। एमबीए में 20 हजार सीटों की स्वीकृति मिली है जिनके लिए दाखिले योग्यता के आधार पर होंगे। पुराने पाठ्यक्रमों के अलावा एसओएल द्वारा इस साल से बीबीए (एफआइए), बीएमएस और बीए (आनर्स) अर्थशास्त्र तीन नए पाठ्यक्रम स्नातक स्तर पर शुरू किए जा रहे हैं। इनके अलावा एमबीए, बीएलआइएससी और एमएलआइएससी तीन नए पाठ्यक्रम स्नातकोत्तर स्तर पर शुरू किए जा रहे हैं। दाखिले के लिए आनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं और अंतिम तिथि 31 अक्तूबर, 2022 निर्धारित की गई है।

कुलपति योगेश सिंह ने बताया कि 28 साल बाद एसओएल में छह नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए शुरू किए जा रहे ये नए पाठ्यक्रम रोजगार-उन्मुख और पेशेवर पाठ्यक्रम आधारित होंगे। हर साल लगभग साढ़े पांच लाख विद्यार्थी एसओएल में प्रवेश लेते हैं।

इन नए पाठ्यक्रमों के बाद विद्यार्थियों की संख्या में और इजाफा होगा। एमबीए को छोड़कर बाकी पांच नए पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या असीमित है। एमबीए में 20 हजार सीटों की स्वीकृति मिली है जिनके लिए दाखिले योग्यता के आधार पर होंगे। पुराने पाठ्यक्रमों के अलावा एसओएल द्वारा इस साल से बीबीए (एफआइए), बीएमएस और बीए (आनर्स) अर्थशास्त्र तीन नए पाठ्यक्रम स्नातक स्तर पर शुरू किए जा रहे हैं। इनके अलावा एमबीए, बीएलआइएससी और एमएलआइएससी तीन नए पाठ्यक्रम स्नातकोत्तर स्तर पर शुरू किए जा रहे हैं। दाखिले के लिए आनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं और अंतिम तिथि 31 अक्तूबर, 2022 निर्धारित की गई है।


इग्नू व एनएसडीसी विद्यार्थियों के रोजगार और उद्यमशीलता कौशल को बढ़ाएंगे

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) और ्नराष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) संयुक्त रूप से गुणवत्ता और समावेशी शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के 21वीं सदी के कौशल को बढ़ाने और तेज करने के अवसर प्रदान करने के लिए कई पहलों पर सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं, जिससे भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाने में योगदान दिया जा सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिकल्पित कौशल और शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में शिक्षकों, प्रशिक्षकों और जमीनी स्तर के नेताओं की क्षमता निर्माण का पारस्परिक रूप से पता लगाने के लिए उद्योग से जुड़ने, पाठ्यक्रमों में कौशल को जोड़ने की पहल की गई है, जो उच्च शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा के एकीकरण पर जोर देती है। शिक्षा और लक्ष्य 2025 तक व्यावसायिक शिक्षा में 50 फीसद नामांकन और 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 फीसद जीईआर स्थिर और सुरक्षित रोजगार को सक्षम करने के लिए मार्ग बनाने के लिए उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के बीच एक सेतु बनाने की परिकल्पना करता है।

आइआइटी जोधपुर ने शुरू किया सिविल व आधारभूत संरचना इंजीनियरिंग विभाग

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने सिविल आधारभूत संरचना इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना की है। इसमें इंजीनियरिंग और विज्ञान के कई प्रभाग एक साथ शामिल किए गए हैं जो मिल कर कथित चुनौतियों का संपूर्ण सामधान देंगे। विभाग में नई पीढ़ी के इंजीनियर प्रशिक्षित किए जाएंगे जो विशाल आधारभूत संरचना डिजाइन करेंगे। ये स्मार्ट और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होंगे। यह विभाग वर्तमान में ‘सिविल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग’ में बीटेक का संचालन करता है। इस दौरान विद्यार्थी स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा या पर्यावरण में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे।

विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में चार गुना वृद्धि करेंगे सभी आइआइटी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) ने विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में चार गुना वृद्धि करने के लिए कई निर्णय किए हैं। ये फैसले आइआइटी गांधीनगर में आयोजित हुए दो दिवसीय आइआइटी अंतरराष्ट्रीय संबंध सम्मेलन में किए गए। इस सम्मेलन में 19 आइआइटी के 35 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में सबसे पहले यह निर्णय किया गया है कि विदेशी विद्यार्थियों की सहायता के लिए नेपाल, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सुविधा केंद्र शुरू किए जाएंगे।

ये केंद्र इन देशों के विद्यार्थियों को आइआइटी में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके साथ ही ये केंद्र विद्यार्थियों को दाखिले में आने वाली परेशानियों को दूर करने का काम भी करेंगे। देश में 23 आइआइटी के परिसरों का पर्याप्त अंतरराष्ट्रीयकरण करने के उद्देश्य से सालाना 1,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति देने का प्रस्ताव किया है।