Chanakya Niti: पशु-पक्षी भी सिखाते हैं जीवन जीने के गुण, जानिए इस पर आचार्य चाणक्य के विचार

क्लू टाइम्स, सुरेन्द्र कुमार गुप्ता 9837117141

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज के युग में भी मनुष्य को व्यापार, राजनीति, धर्म, शिक्षा और धन से जुड़ी कई बातें बताती हैं। व्यावहारिक ज्ञान पर टिकी चाणक्य नीति व्यक्ति को सहजता से जीवन के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती हैं। वहीं आचार्य चाणक्य ने पशु-पक्षियों से कुछ खास गुणों को जीवन में अपनाने की भी सीख दी है...

चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य की नीतियों का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है। आज कलयुग में भी चाणक्य नीतियां मनुष्य को सूझबूझ के साथ जीवन जीने और सफलता हासिल करने की सीख देती हैं। आचार्य चाणक्य का मानना है कि मनुष्य को ज्ञान और गुण कहीं से तथा किसी से भी मिले उसे प्राप्त कर लेना चाहिए। वहीं चाणक्य नीति में पशु-पक्षियों के गुणों का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें मनुष्य अपने जीवन में अपनाकर सफलता प्राप्त कर सकता है...

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आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस प्रकार गधे में यह गुण होता है कि वह बिना सर्दी-गर्मी का विचार किए हुए अत्यंत थक जाने पर भी बोझ ढोता है और फिर भी हमेशा संतुष्ट होकर विचरण करता है। उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में लगातार आगे बढ़ने के लिए सहनशीलता और संतोषी भाव रखना चाहिए।

बगुले से सीखें संयमित रहना
चाणक्य नीति के अनुसार जो व्यक्ति अपनी सभी इंद्रियों पर विजय पा लेता है उसे जीवन में हर मोड़ पर सफलता हासिल होती है। जैसे बगुला अपनी सभी इन्द्रियों को संयम में रखकर अपना शिकार करता


है। उसी तरह मनुष्य को अपनी काबिलियत, परिस्थितियों, समय और जगह को भली-भांति समझकर सभी कार्यों को करना चाहिए। चाणक्य नीति के अनुसार जो व्यक्ति बगुले से यह एक गुण सीखकर एकाग्रता के साथ अपना कर्म करता है उसे तरक्की जरूर मिलती है।

मुर्गे से सीखें सतर्क रहना
आचार्य चाणक्य के मुताबिक सुबह जल्दी उठना, रण में कभी पीछे न हटना, अपने परिजनों से मिल-बांटकर खाना और आगे बढ़कर शत्रु से अपने भक्ष्य को छीन लेना, ये सभी गुण मनुष्य को मुर्गे से सीखने चाहिए। आचार्य चाणक्य ने मुर्गे के इन गुणों द्वारा व्यक्ति को ब्रह्ममुहूर्त में उठने, युद्ध में शत्रु का डटकर सामना करने और अपने बंधुओं से मिलकर रहने की सीख दी है।