दिल्‍ली-मेरठ के बीच चलने वाली देश की पहली रीजनल रेल में कई खासियत


नई दिल्‍ली. दिल्‍ली-मेरठ के बीच चलने वाली देश की पहली रीजनल रेल कई खासियत समेटे हुए हैं. इन्‍हीं में से एक है चलती ट्रेन में झटके न लगना. ट्रेन जब पूरी स्‍पीड से यानी 180 किमी. प्रति घंटे की स्‍पीड से दौड़ेगी, तब भी यात्रियों को झटका नहीं लगेगा. इतना ही नहीं ट्रेन रुकते समय या चलते समय भी यात्रियों को झटके नहीं लगेगे. यानी यात्री ट्रेन में बगैर हैंडल पकड़े खड़े रह सकते हैं. नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC)के एमडी के अनुसार ट्रेन में साधारण ट्रेन या मेट्रो से अलग तकनीक इस्‍तेमाल की जा रही है.

सामान्‍य ट्रेन या मेट्रो में चलते समय या रुकते समय झटका लगता है. कई बार इस झटके की वजह से यात्री गिर जाते हैं. चूंकि रैपिड ट्रेन की स्‍पीड 180 किमी. प्रति घंटे होगी. इसलिए तेज झटके लगने की संभावना है. इसी को ध्‍यान में रखते हुए एनसीआरटीसी ने नई तकनीक ईजाद करवाई है. एनसीआरटीसी के एमडी विनय कुमार सिंह ने बताया कि रैपिड ट्रेन का डिजाइन यात्रियों की सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए कराया गया है. स्‍पीड पकड़ते या रुकते समय ट्रेन में झटके नहीं लगेंगे.

एमडी ने बताया कि ट्रेन के फर्श की ऊंचाई एक जैसी होगी. सामन्‍य ट्रेन या मेट्रो में जहां पर कोच का ज्‍वाइंट होता है, वहां पर फर्श थोड़ी ऊंची होती है. कई बार यात्री इससे टकरा जाते हैं, लेकिन रैपिड ट्रेन में फर्श एक जैसी होगी. यानी कोच के ज्‍वाइंट का पता ही नहीं चलेगा.

इतना ही नहीं इस ट्रेन की ऊंचाई मेट्रो की तुलना में अधिक है. मेट्रो की सुरंग की ऊंचाई 5.5 मीटर है,जबकि रैपिड रेल के सुरंग की ऊंचाई 6.5 मीटर है.