कड़ी सुरक्षा के बीच जिले से गुजरा प्रधानमंत्री का काफिला

कड़ी सुरक्षा के बीच जिले से गुजरा प्रधानमंत्री का काफिलागाजियाबाद . मेरठ में आयोजित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान उनका काफिला कड़ी सुरक्षा के बीच जिले से होकर गुजरा। उनका काफिला सुबह दिल्ली से गाजियाबाद होते हुए मेरठ रवाना हुआ और वापसी में मेरठ से गाजियाबाद होते हुए दिल्ली गया। इस दौरान एनएच-9 व दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर यातायात बंद रखा गया। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह, एसएसपी पवन कुमार समेत अन्य पुलिस प्रशासन के अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहे।

मेरठ में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का हवाई मार्ग से जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन रविवार सुबह ²श्यता कम होने पर उनका कार्यक्रम अचानक बदला गया और सड़क मार्ग से मेरठ जाने का कार्यक्रम तय हुआ। उनका कार्यक्रम पुलिस-प्रशासन को मिलते ही अधिकारियों ने आनन-फानन में रूट डायवर्जन और सुरक्षा का खाका तैयार किया। रविवार सुबह उनके काफिले ने 10:55 पर जिले की सीमा में प्रवेश किया और जिले में करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर काफिला दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से मेरठ की ओर रवाना हुआ। वापसी में उनका काफिला दोपहर बाद करीब 3:40 बजे जिले की सीमा में प्रवेश कर गया और 4:15 बजे दिल्ली की सीमा में पहुंचा। एसएसपी पवन कुमार ने बताया कि दिल्ली व मेरठ पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार उनका काफिला आने से 15 मिनट पहले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के सभी प्रवेश मार्गों को बंद कर दिया गया था। उनके रवाना होने के बाद वाहनों को प्रवेश खोला गया। दो मिनट के लिए यूपी गेट पर रुके : मेरठ से दिल्ली जाने के दौरान प्रधानमंत्री की कार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी साथ थे। जबकि दूसरी कार में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल थीं। इस दौरान मोदी का काफिला दो मिनट के लिए यूपी गेट पर रुका। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री की कार से अपनी कार में बैठे। आनंदी बेन और योगी का काफिला हिडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ, जबकि प्रधानमंत्री का काफिला दिल्ली के लिए रवाना हो गया। मुख्यमंत्री व राज्यपाल हिडन एयरपोर्ट से लखनऊ के लिए हवाई मार्ग से रवाना हुए। चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस : प्रधानमंत्री के काफिले के जिले से गुजरने के दौरान चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। इस दौरान किसी को भी एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर जाने की अनुमति नहीं थी। जिले के 30 किलोमीटर के मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, जो पल-पल की गतिविधियों पर निगाह बनाए हुए थे।