मरहूम अकबर इलाहाबादी का नाम बदलकर अकबर प्रयागराजी करने का मामला इन दिनों खूब चर्चा में


'नमूनों पर टिकी है गीत-सुर-ग़ज़लों की पैमाइश' पढ़िये कुमार विश्वास ने क्यों ट्वीट की ये शानदार लाइन

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग द्वारा देश के जाने-माने शायर मरहूम अकबर इलाहाबादी का नाम बदलकर अकबर प्रयागराजी करने का मामला इन दिनों खूब चर्चा में हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर अपनी धारदार टिप्पणी के लिए जाने जाने वाले देश के चर्चित कवि कुमार विश्वास ने भी इस पर इशारों-इशारों में अलग ही अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। कवि कुमार विश्वास ने ट्वीट के जरिये कहा है- 'नमूनों पर टिकी है गीत-सुर-ग़ज़लों की पैमाइश।'

बता दें कि उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग द्वारा अपनी वेबसाइट पर अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी करने पर देशभर के मशहूर साहित्यकारों और शायरों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इसी कड़ी में कुमार विश्वास ने ट्वीट के जरिये ये पंक्तियां इंटरनेट मीडिया पर शेयर की हैं।

हमें दुनिया में भेजा इसका तो अब क्या करें शिकवा,

ये शिकवा है कि ऐसे दौर में पाई है पैदाइश ,

कबीरो गालिबो मीराँ ओ मीरो हो गए रुखसत,

नमूनों पर टिकी है गीत-सुर-ग़ज़लों की पैमाइश..!'

इससे पहले नवंबर, 2017 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक विवाद को लेकर कुमार विश्वास ने इन्हीं पंक्तियों में थोड़ा बदलाव कर लिखा था, जो इस तरह है।

'हमें दुनिया में भेजा इसका तो अब क्या करें शिकवा,

ये शिकवा है कि ऐसे दौर में पाई है पैदाइश,

कबीरो गालिबो मीरां ओ मीरो हो गए रुखसत,

लंफगों पर टिकी है गीत-सुर-ग़ज़लों की पैमाइश।'

बता दें कि अपनी शायरी और कविताओं के लिए देश-दुनिया मेें मशहूर कुमार विश्वास अपने चुटीजे अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। वह अपने अलग ही अंदाज में देश-दुनिया में हो रही घटनाओं पर टिप्पणी करते हैं। खासकर राजनीतिक मसलों पर उनकी टिप्पणी को लोग खूब पसंद करते हैं और इन पर इंटरनेट मीडिया पर प्रतिक्रिया भी देतेे हैं। 

यह है पूरा मामला

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपनी इंकलाबी शायरी से क्रांति की अलख जगाने वाले अकबर इलाहाबादी का नाम बदलकर अकबर प्रयागराजी कर दिया गया। वहीं, विवाद बढ़ा तो इस ठीक भी कर दिया गया, लेकिन इसको लेकर उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की खूब किरकरी हुई है। बता दें कि सिर्फ अकबर इलाहाबादी ही नहीं, बल्कि आयोग ने तेग इलाहाबादी और राशिद इलाहाबादी जैसे शायरों का नाम भी बदला। आयोग की वेबसाइट में 'अबाउट इलाहाबाद' वाले कालम में सबके नामों के आगे से इलाहाबादी हटाकर प्रयागराजी किया गय। आयोग द्वारा किए गए बदलाव की साहित्य जगत में कड़ी आलोचना हुई तो इस ठीक किया गया। हालांकि, इसकी आलोचना करने वाले साहित्यकारों का कहना है कि नाम बदलना रचनाकार की हत्या करने के समान है, जिसे कोई स्वीकार नहीं करेगा। अकबर इलाहाबादी ही उनकी पहचान है। जिला का नाम भले बदलकर प्रयागराज किया गया हो पर इतने बड़े शायर का नाम नहीं बदलना चाहिए।

बता दें कि शहरों, जिलों का नाम बदलने का चलन तो है, लेकिन हाई कोर्ट और किसी शख्स का नाम नहीं बदला जाता है। मसलन, इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज तो कर दिया गया, लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट का नाम नहीं बदेलगा, इसी तरह बोम्बे अब मुंबई है, लेकिन बोम्बे हाई कोर्ट का नाम नहीं बदला गया है।