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आचार्य चक्रदत्त ने खोजी सायटिका की विशिष्ट औषधी - पारिजात

उन्हीं दिनों आचार्य चक्रदत्त ने भी अपना अनुभव संसार को बताते हुए कहा - 'गंभीर गृध्रसी में भी पारिजात काफी प्रभावी औषधी है।'

आधुनिक चिकित्सा वैज्ञानिकों ने भी पारिजात के गुण-कर्म स्वीकारे:

उनका अनुभव काम कर गया। बाद के वैद्यों ने गृध्रसी रोग में पारिजात का विशिष्ट उपयोग किया और अनगिनत रोगियों को आराम दिया।


हाल के दिनों में, वैज्ञानिकों ने भी आचार्य चक्रदत्त के कथन की पुष्टि करते हुए बताया कि पारिजात में निम्न गुण-कर्म रहते हैं -

• यह शोथहर (Anti-inflammatory) है;

• यह वेदनाहर (Analgesic) है;

• यह ज्वरनाशक (Anti-pyretic) है;

• यह आमवात-रोधी (Anti-rheumatic) है;

• यह नाडी-बल्य (Nerve tonic) है;

• यह मनोबल्य (Anti-depressant) है; तथा

• यह मनोशामक (Sedative) है।

कहने की जरूरत नहीं है कि पारिजात की उपरोक्त सभी क्रियाएं इसे साइटिका के उपचार में एक विशिष्ट दवा बनाती हैं।

पारिजात पर हमारे चालीस वर्षों के चिकित्सकीय अनुभव:

अंत में, हम चालीस वर्षों में फैले अपने स्वयं के अनुभवों पर आते हैं।

कुल मिलाकर, साइटिका से पीड़ित अधिकांश रोगियों में हम लोगों ने पारिजात को काफी प्रभावी पाया है।

अधिकांश रोगियों में, उपचार शुरू करने के तीन दिनों के भीतर सुधार आने लगता है। कभी-कभी, सुधार दो दिनों में या उससे भी पहले आने लगता है। कुछेक मरीज़ों को तो पहली ही खुराक से सुधार आने लगता है।

ज्यादातर मामलों में सुधार निम्न रीति से होता है -

1. दर्द में राहत (कमर से पैर तक)। राहत हल्की से लेकर काफी अधिक तक हो सकती है।

2. रोगी के बैठने, खड़े होने, और चलने की क्षमता (पहले सहारे के साथ और बाद में बिना सहारे के) में बढ़ौतरी होती है।

3. कमर व टाँग की जाड्यता व खिंचावट में कमी आती है।

4. रोगी को अच्छा लगने लगता है।

फिर भी, अंतिम परिणाम बहुत कुछ मूलभूत विकृतियों पर निर्भर करता है।ये निम्न हो सकती हैं -

• कटि-वात (Lumbar spondylosis);

• मेरुदण्ड-भ्रंश (PIVD);

• मेरुदण्डगत-तरुणास्थि क्षय (Disc degeneration);

• कटिशूल (Low backache)

पारिजात मुख्य रूप से रीढ़ में शोथ-युक्त व क्षतिग्रस्त धातुओं और दबी हुई नाडियों पर कार्य करके दर्द से राहत प्रदान करता है। जबकि अन्तिम परिणाम इस बात पर भी निर्भर करता है कि मूलभूत विकृतियों का उपचार कैसा किया जाता है।

उदाहरण के लिए, कटि-वात, तरुणास्थि-क्षय, क्षति, संक्रमण, ट्यूमर, आदि की मौजूदगी में इन विकृतियों का सन्तोषजनक (दवा या शल्यक्रिया द्वारा) उपचार करना भी अनिवार्य होता है।

निष्कर्ष:

गृध्रसी से पीड़ित रोगियों में दर्द, जकड़न और सूजन से राहत के लिए पारिजात एक विश्वसनीय, विशिष्ट दवा है।

उपलब्धता:

पारिजात निम्न रूप में उपलब्ध है -

पारिजात घन टैब्लॅट 600 मिलीग्राम घन (इक्स्ट्रैक्ट) 3 ग्राम चूर्ण के बराबर।

मात्रा व प्रयोग:

दर्द की तीव्रता और शरीर के वजन के आधार पर, पारिजात टैब्लॅट 1-2 टैब्लॅट्स, दिन में 3-6 बार से आरम्भ करें।  इसे भरे पेट सादे पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए। सुधार होने पर, मात्रा धीरे-धीरे कम करते जायें।

Dr.Vasishth's AyuRemedies