आज विश्व गौरेय्या दिवस पर कुछ विचारें


आज विश्व गौरेय्या दिवस पर कुछ विचारें

आँखें खोज रहीं हैं 

नन्ही सी चिड़िया को 

अपने कलरव से शोर मचाती 

नींद से रोज हमें जगाती 

चींचीं चींचीं करती 

आंगन में फुदकती 

हाथ कभी न आती 

कभी घोंसले कोने में 

वह मेहनत से बनाती 

हम देखते जब अंडे देती 

कभी कभी गलती होती 

अंडे टूटते या बच्चे निकलते 

लेकिन अब कहाँ है वह ?

जागो शहर जागो शहर 

इनको जीने का अधिकार दो ।

जीओ और सबको जीने दो ।

चहचहाने दो ,शोर मचाने दो ।

बच्चों को इनके पीछे भागने दो ।


अनिला सिंह आर्य