ड्रैगन की नापाक साजिश का पर्दाफाश ! डोकलाम क्षेत्र में तेजी से कर रहा निर्माण कार्य, भूटान ने टिप्पणी से किया इनकार

ड्रैगन की नापाक साजिश का पर्दाफाश ! डोकलाम क्षेत्र में तेजी से कर रहा निर्माण कार्य, भूटान ने टिप्पणी से किया इनकार

प्रतिरूप फोटो

रॉयटर्स ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि चीन ने भूटान के साथ अपनी विवादित सीमा पर दो मंजिला इमारतों के साथ-साथ 200 से ज्यादा संरचनाओं का निर्माण तेजी से करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही चीन ने छह स्थानों पर निर्माणाधीन बस्तियों के निर्माण में भी तेजी लाई है।

नयी दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर भारत और चीन के बीच गतिरोध बना हुआ है। इसी बीच चीन की नापाक चाल का खुलासा हुआ है। पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के अलावा चीन ने भूटान के साथ विवादित जमीन पर निर्माण कार्य को तेजी से अंजाम दे रहा है। माना जा रहा है कि चीन के इस निर्माण से भविष्य में भारत को काफी ज्यादा नुकसान हो सकता है क्योंकि चीन विवादित जमीन पर एक, दो नहीं बल्कि 200 से ज्यादा संरचनाओं का निर्माण कर रहा है।

अंग्रेजी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया है कि चीन ने भूटान के साथ अपनी विवादित सीमा पर दो मंजिला इमारतों के साथ-साथ 200 से ज्यादा संरचनाओं का निर्माण तेजी से करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही चीन ने छह स्थानों पर निर्माणाधीन बस्तियों के निर्माण में भी तेजी लाई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डेटा एनालिटिक्स फर्म हॉकआई 360 ने रॉयटर्स को विवादित क्षेत्र की कुछ तस्वीरें दी हैं। जिसमें विश्लेषण किया गया है कि भूटान के साथ लगती सीमा पर चीन काफी तेजी से निर्माण कार्य कर रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक भूटान की पश्चिमी सीमा के साथ कुछ स्थानों में निर्माण से संबंधित गतिविधियां साल 2020 की शुरुआत से ही चल रही हैं। सैटेलाइट इमेजरी फर्म कैपेला स्पेस और प्लैनेट लैब्स द्वारा प्रदान की गई सामग्री के आधार पर पता चला है कि, इन इलाकों में चीन पटरियों के निर्माण के साथ साथ कई और दूसरे तरह के निर्माण कार्य कर रहा है।

हॉकआई 360 में मिशन एप्लिकेशन निदेशक क्रिस बिगर्स ने बताया कि ये तस्वीरें बताती हैं कि साल 2021 के बाद चीन ने निर्माण कार्यों में तेजी लाई है। संभवत: इसीलिए छोटे ढांचे घरेलू उपकरण और आपूर्ति के लिए बनाए गए थे, इसके बाद नींव रखी गई और फिर इमारतों का निर्माण किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, कैपेला स्पेस द्वारा नए निर्माण स्थलों और हाल ही में ली गई तस्वीरों का अध्ययन करने वाले दो अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि सभी छह बस्तियां चीन और भूटान द्वारा विवादित क्षेत्र में बनाई जा रही है, जिसमें लगभग 110 वर्ग किलोमीटर का विवादित क्षेत्र शामिल है। 

इस मामले को लेकर अंग्रेजी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भूटान के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। जिस पर उन्हें जवाब मिला कि भूटान की यह नीति है कि वह जनता के बीच सीमा के मुद्दों पर बात न करे। इसके अलावा मंत्रालय ने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया। वहीं निर्माण कार्य को लेकर जब चीनी विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के रहने और काम करने की स्थिति में सुधार के लिए निर्माण कार्य किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि यह चीन की संप्रभुता के भीतर है कि वह अपने क्षेत्र में सामान्य निर्माण गतिविधियों को अंजाम दे।

वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि ये गांव बीजिंग को कुछ रणनीतिक महत्व भी देते हैं। नया निर्माण भारत, भूटान और चीन की सीमाओं के जंक्शन पर डोकलाम क्षेत्र से 9 से 27 किमी दूर है, जहां भारतीय और चीनी सैनिक साल 2017 में दो महीने से अधिक समय तक आमने-सामने थे।

इस संबंध में रॉयटर्स ने भारतीय विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया लेकिन अभी तक वहां से कोई भी जवाब नहीं मिला है। आपको बता दें कि 8 लाख से कम लोगों वाला देश भूटना अपनी 477 किमी लंबी सीमा से जुड़े विवाद को समाप्त करने के लिए करीब चार दशक से बीजिंग के साथ बातचीत कर रहा है। भूटानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भूटान और चीन अपने मतभेदों को सुलझाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अप्रैल 2021 में सीमा वार्ता को लेकर सहमत हुए थे। 

लद्दाख में भारत-चीन आमने-सामने

भारत अपने पड़ोसी देश चीन के साथ 3,500 किमी लंबी सीमा साझा करता है। डोकलाम से करीब 1,100 किमी दूर पूर्वी लद्दाख में जारी विवाद को लेकर दोनों मुल्कों की सेनाओं आमने-सामने हैं। इतना ही नहीं भारत अपनी सीमाओं से सटे इलाकों पर चीन के निर्माण कार्यों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। आपको बता दें कि डोकलाम में चीन की मौजूदगी भारत के लिए किसी खतरे से कम नहीं है क्योंकि डोकलाम पर नियंत्रण संभावित रूप से चीन को भारत के चिकन नेक क्षेत्र में रणनीतिक तौर पर बढ़त देगा। दरअसल, भारत में उत्तरपूर्वी क्षेत्र को जोड़ने वाले हिस्से को चिकन नेक कहा जाता है।

ऑस्ट्रेलियाई सामरिक नीति संस्थान अनुसंधान संगठन के एक शोधकर्ता नाथन रुसर ने कहा कि चीनी निर्माण का मुकाबला करना भारत और भूटान के लिए एक चुनौती होगी।