शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने सोमवार को गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर में सनातन धर्म अपनाया

डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने उनको अपना भाई मानते हुए कहा कि अब जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी की जाति त्यागी और गोत्र वत्स है।

शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ने अपनाया सनातन धर्म, नाम रखा- जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी
गाजियाबाद . शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने सोमवार को गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर में सनातन धर्म अपनाया। पांच पंडितों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई और उनको नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी दिया है। 

छह दिसंबर को ही सनातन धर्म से जुड़ने को खास दिन बताते हुए उन्होंने कहा कि मैंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर की जगह को बगैर किसी विवाद के लौटाने की बात कही, संघर्ष किया। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की तो इस्लाम में मेरा विरोध शुरू हो गया। मेरे खिलाफ हर जुमे पर नमाज के बाद सिर कलम करने के फतवे जारी किए जाते हैं, जिसमें ईनाम की राशि को बढ़ाया जाता है। छह दिसंबर को ही अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि से कलंक मिटाया गया था, हिंदुओं के लिए यह खुशी का दिन है। इसलिए आज के दिन ही सनातन धर्म से जुड़ने का निश्चय किया। पाकिस्तान में हिदुओं के कत्ल पर मुस्लिम समाज के लोग सेल्फी खींचते हैं। यह शर्म की बात है। आइएसआइएस द्वारा शिवजी की मूर्ति को खंडित किया जाता है, वहां इस्लामिक झंडा फहराया जाता है। इस पर रोक लगनी चाहिए। ऐसे संगठनों के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। मुझे इस्लाम से निकाला गया, इसलिए सनातन धर्म अपनाया : वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी बनने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने इस्लाम धर्म नहीं छोड़ा है, मुझे इस्लाम धर्म से निकाला गया है। सनातन धर्म विश्व का सबसे पुराना धर्म है, यह धर्म लोगों को इंसान बनने के लिए प्रेरित करता है। लोगों के बीच मोहब्बत पैदा करता है, इसलिए मैंने सनातन धर्म अपनाया है। मुझे यति नरसिंहानंद गिरि ने अपने समाज से जोड़ा है, इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। त्यागी समाज से जुड़ने की ये है वजह: त्यागी समाज से ही जुड़ने के सवाल पर जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी ने कहा कि मुस्लिमों ने मेरा त्याग कर इस्लाम से निकाला है। दूसरी तरफ, त्यागी समाज से ही ताल्लुक रखने वाले डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने मुझे अपनाया है। अपना भाई माना है, इसलिए सनातन धर्म में त्यागी समाज से जुड़ा हूं। परिवार के जो लोग साथ नहीं, उनका करूंगा त्याग: उन्होंने कहा कि मेरे परिवार के अन्य लोगो को भी सनातन धर्म स्वीकार करना चाहिए। मैं अपनी मां या परिवार के अन्य सदस्यों पर दबाव नहीं डालूंगा। यदि वो लोग मेरे साथ नहीं आए तो उनका त्याग करूंगा। मेरी मां किसी भी धर्म में रहें, मुझे उनसे कोई आपत्ति नही है। इस्लाम में मुझे इन चीजों से थी आपत्ति: जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी ने बताया कि इस्लाम में मूर्ति पूजा न करने वालों का विरोध करने की बात कही जाती है, मैं इसका विरोध करता हूं। मैंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की जगह को बगैर किसी विवाद के लौटाने की बात कही थी। कुरान की 26 आयतें हटाने की मांग की थी। इसके साथ ही जिन मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं, उन स्थानों पर मंदिर बनाने की बात कही। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों का विरोध किया। लोगों को इस्लाम की कमियां बताईं, उनको विस्तार से समझाने के लिए किताब भी लिखी। लेकिन इस्लाम धर्म के धर्मगुरुओं ने मेरा विरोध किया और मेरे खिलाफ फतवे जारी किए हैं। 

बयान

वसीम रिजवी का त्यागी समाज में स्वागत है। उन्होंने अच्छे कार्य के लिए सनातन धर्म अपनाया है। हमें यह अच्छा कदम लगा। - अजय त्यागी, महानगर अध्यक्ष, अखिल भारतीय त्यागी ब्राह्मण सभा।