चीन बना रहा है वानर-मानवों की सेना, खनन, कृषि कार्य में उपयोग किए जाएंगे यह सुपर सोल्जर

चीन बना रहा है वानर-मानवों की सेना, खनन, कृषि कार्य में उपयोग किए जाएंगे यह सुपर सोल्जर

उन्होंने कहा कि इस तरह के जानवर का इस्तेमाल, खनन, भारी कृषि कार्य, अंतरिक्ष और समुद्र जैसी जग् पर खोज के लिए किया जाएगा। हालांकि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिसमें वानर मानव के उत्पादन की बात सामने आई हो।

चीन की लैब में  एक ऐसे वानर मानव को बनाने की कोशिश की जा रही है, जो बोल सके और उसमें चिंपैंजी की तरह ताकत हो। बहुत लंबे समय से यह कोशिश की जा रही है कि, इंसान और जानवरों के बीच हाइब्रिड बनाई जाए। यह कोशिश आज भी जारी है ताकी जब ऑर्गन ट्रांसप्लांट की बारी आए तो इसे सरल बनाया जा सके। 2019 में यूएस साल्क इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल के प्रोफेसर जुआन कार्लोस इजपिसुआ बेलमोंटे के नेतृत्व में वैज्ञानिकों को को एक बड़ी कामयाबी मिली थी। बता दें कि इस टीम ने एक मानव और बंदर का हाइब्रिड तैयार किया था जो 19 दिन तक जिंदा रहा।

1920 के दशक में तानाशाह स्टालिन ने एक बंदर मानव जैसा सुपर सैनिक बनाने का निर्देश सोवियत के वैज्ञानिकों को दिया था। एक ऐसा बंदर मानव जो हर हालात में काम कर सके वह ऐसी चरम परिस्थितियों में भी रह सके जहां इंसान का जिंदा बचना मुश्किल था। उस वक्त के दस्तावेज जिन्हें आगे चलकर 1990 के दशक में सबके सामने सार्वजनिक किया गया था, बताते हैं कि, स्टालिन बेहद ताकतवर लेकिन अविकसित दिमाग वाली मानव बंदरों की सेना चाहते थे जो लचीली और भूख प्रतिरोधी हो।

 इस परियोजना की कमान इल्या इवानोविच इवानोव के हाथ में थी। ऐसा लगता नहीं कि, यह सफल हुआ था। क्योंकि इवानोव की मौत 1930 के दशक के शुरुआत में सोवियत कैंप में हो गई थी। वक्त बीता और 1970 के दशक में मानव विशेषताओं के साथ एक कथित म्युटेंट चिंपांजी ने ह्यूमनजी के ख्याल को फिर हवा दी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि, सर्कस में खेल दिखाने वाले एक बंदर के बारे में ऐसी सूचना मिली कि उसके अंदर मानव चिंपैंजी हाइब्रिड हो सकता है। चिंपैंजी अन्य की तुलना में ज्यादा बुद्धिमान प्रतीत होता था और इसके शरीर में बाल भी कम थे।

 1967 में ऐसा ही प्रयोग चीन ने भी किया

  जब सर्कस में पाए जाने वाले उस बंदर ओलिवर का पोस्टमार्टम किया गया तो वह एक सामान्य चिंपैंजी निकला। ऐसी ही एक रिपोर्ट 1980 के दशक में सामने आई। इस रिपोर्ट में कहा गया कि 1967 में चीन में भी मानव चिंपैंजीक्रॉस ब्रीडिंग का एक प्रयोग किया गया था। माना जाता है कि, चीनी सरकार ने इस योजना को दोबारा शुरू करने के लिए कहा था।  इस परियोजना में शामिल रहे एक वैज्ञानिक डॉक्टर जी योंगजियांग ने कहा कि, उनका लक्ष्य एक ऐसा जानवर पैदा करना था जो बोल सके और जिसमें चिंपैंजी जैसी ताकत हो

अभी भी हो रहा है चीन की लैब में रिसर्च

 उन्होंने कहा कि इस तरह के जानवर का इस्तेमाल, खनन, भारी कृषि कार्य, अंतरिक्ष और समुद्र जैसी जग् पर खोज के लिए किया जाएगा। हालांकि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिसमें वानर मानव के उत्पादन की बात सामने आई हो। द सन में यह कहा गया है कि, एक वानर मानव का जन्म अमेरिका में एक हाइब्रिडाइजेशन के दौरान हुआ था। लेकिन फिर लैब कर्मियों ने उसे मार दिया। इस प्रोजेक्ट पर अब भी चीन की एक लैब काम कर रही है।