महंगाई की मार सोती सरकार

 देश में लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है और बड़े ही दुख की बात है की कहीं इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है.

लगातार पेट्रोल डीजल के दामों में वृद्धि के चलते आम आदमी के घर का बजट लगातार बिगड़ता जा रहा है और मोदी सरकार जिस नारे को लेकर सत्ता में आई थी लगता है बीते वक्त के साथ उस नारे को भुला बैठी है,
2014 से पहले-"बहुत हुई महंगाई की मार ,अबकी बार मोदी सरकार"
सरकार लगातार कल्याणकारी योजनाओं का हवाला देकर बचती फिर रही है, ये कैसा देशहित है जो देश की जनता को गरीब से और गरीब बनाता जा रहा है??
उज्ज्वला योजना के नाम पर जनता को गैस सिलेंडर दिए तो गए परन्तु गैस के दाम बढने के बाद गरीबों से ये पूछने उनके घर कोई नेता नहीं गया की गैस भरवाई की नहीं??
महामारी की केवल सरकार पर ही नहीं देश की जनता पर भी पड़ी है सरकार को आंखें खोलकर ये समझने की जरूरत है,
और केवल देश की जनता पर ही सारा बोझ क्यों डाला जाए हम तो कहते हैं की देश के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं तो देश के कर्मठ, ईमानदार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, इन सभी की आय का 20% से 30% हिस्सा देशहित में लगाया जाए आखिर देश की जनता ही अपनी देशभक्ति हर बार क्यों साबित करें राजनैतिक लाभ लेने वाले राजनेताओं का देश के प्रति कोई दायित्व नहीं है??
ये कैसा विकास हो रहा है देश का जिससे देश की जनता समृद्ध नहीं बल्कि कंगाल होती जा रही है,
देश तरक्की तभी करेगा जब देश का नागरिक समृद्ध होगा और देश का नागरिक जब समृद्ध होगा जब उसकी बचत बढ़ेगी और जिस प्रकार लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है ऐसे में आने वाला समय देश की जनता के आर्थिक हालातों को बिगाड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
मौजूदा सरकार की नीतियां फिलहाल तो फेल होती नजर आ रही है और देश की जनता भी जल्द इसका जवाब देने को तैयार है।