छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी के सबसे छोटे सुपुत्र नवम गुरु तेगबहादुर जी हिन्द की चादर की शहादत को नमन

गुरु तेग बहादुर जी ने #हिन्दुस्थान की बहू बेटी की लाज और #हिन्दू_धर्म पर हो रहे अत्याचार से रक्षा को अपना तन ही लगा दिया।
अपने जीवन के बलिदान से उन्होंने उस #निरभयउ_निरवैर के मन्त्र के साथ ही #आत्मा_अजर_अमर है के मूलमंत्र को #कृतिरूप से सिद्ध किया और सोये #भारत में एक नई शक्ति का संचार किया।
जब अमृतसर में सिक्खी और गुरु वाणी के साथ युद्ध के स्वर सुनाई देते थे हाथों में माला के साथ तेग/कटार दिखने लगी थी ऐसे समय में #निरवैर किसी से वैर नहीं करना और #निरभउ मृत्य के भय से रहित जीवन जीने का संदेश देते हुए
#आपा_चीनै अपने को पहचानों अंतश्चेतना को जाग्रत करने आत्मचिंतन का संदेश देने निकले उन्होंने कहा भ्रम संशय से रहित #त्याग_और_वैराग्य युक्त जीवन #आत्मचेतना से ही प्राप्त होता है। जीवन में किये शुभ कार्य हमें परमात्मा के निकट ही लाते हैं।
मनुष्य जीवन छोटा सा है सदुपयोग करो केवल धन कमाने में मत भटको
" #लोभि ग्रसियो दस हू दिस धावत आसा लागिओ धन की"
जीवन में #बल_को_बढाओ बल से ही सब उपाय होते हैं। वो बल शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक सब प्रकार का होता है।
" #बल होआ #बंधन छुटे सब किछु होत उपाय"
उन्होंने #तेग धार को व्याखित करते हुए कहा जैसे बिना धार की तलवार से युद्ध नहीं जीते जाते उसी प्रकार #कमजोर_शरीर से जीवन नहीं जिया जाता #श्रेष्ठ_कर्म करो।
‎2 लोग, दाढ़ी और ‎वह टेक्स्ट जिसमें '‎धर्म व सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले सिकरों के नौवें गुरु गुरु तेगबहादुर सिंह जी के बलिदान दिवस पर कोटि कोटि-कोटि नमन פעල अरविन्द भाई ओझा कथा व्यास‎' लिखा है‎‎ की फ़ोटो हो सकती है