स्मार्टफोन से लैस हुई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, सीएम योगी बोले- शीघ्र ही और बढ़ेगा मानदेय


लखनऊ. कोविड की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां (Anganwadi workers) अब स्मार्टफोन से लैस हो गई हैं. मंगलवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने 1 लाख 23 हजार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन वितरित किया है. इसके साथ ही, नवजात बच्चों की वृद्धि का स्तर मापने के लिए प्रदेश के हर आंगनबाड़ी केंद्र को नवजात वृद्धि निगरानी यंत्र (इंफेंटोमीटर) भी प्रदान किया है. मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ को स्मार्टफोन वितरण कार्यक्रम में इनके मानदेय में और भी बढ़ोतरी का संकेत दिया.


सीएम योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बढ़ाया और उनके कई साहसिक कार्य की जमकर सराहना भी की. इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले दिनों जो मानदेय बढ़ाया गया था वह परफॉर्मेंस आधारित था. यह पिछला बकाया था, जो उन्हेंं दिया गया था. अब तो फिर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं मानदेय बढ़ाया जाएगा. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में एक लंबी दूरी तय किया है. हर एक विभाग ने कुछ नया किया है. आज से 4 साल पहले क्या स्थिति थी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देखकर हम भय खाते थे. आज परिवर्तन हुआ है. सीएम योगी ने आगे कहा कि मैं हमेशा कहता था, हम तकनीकी के माध्यम से शासन की योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने का कार्य करेंगे, तकनीकी के लिए आवश्यक संसाधन उन लोगों को पहुंचाने का कार्य करें जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का कार्य करते हैं.

आज का कार्यक्रम महत्वपूर्ण है, यह स्मार्टफोन वितरण या डिवाइस वितरण का कार्यक्रम ही नहीं है, बल्कि ये सुशासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का है. 4 साल पहले हम भय खाते थे कि आंगनबाड़ी बहनें न जाने कब धरना प्रदर्शन पर बैठ जाएं. जबकि अब धारणाएं बदली हैं,आपत्ति आने पर यही बहनें आगे आई थीं. उन्होंने आगे कहा कि कोई भी व्यक्ति कितना भी बुद्धिमान हो, जबतक उसका काम लोककल्याण के लिए न आए तब तक कोई अस्तित्व नहीं है. एक समय यूपी को फोकस करके मीडिया ट्रायल शुरू हो गया था, जबकि कोरोना अन्य राज्यों में भी था. लेकिन, हम पर हर ओर से हमले करके और कठघरे में खड़ा करने की कोशिश हुई. तब हमने तय किया कि निगरानी समिति का गठन किया जाए. हमने दूसरी लहर में अप्रैल के महीने में निगरानी समिति का गठन कर दिया था.