साड़ी को राष्ट्रीय परिधान घोषित करते हुए दिल्ली के उक्त रेस्त्रां के खिलाफ कार्रवाई की जाए

 


मेरठ। अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्नातक संघ की मेरठ शाखा की जिलाध्यक्ष सपना अग्रवाल और महामंत्री ऋचा सिंह की अगुवाई में बुधवार को महिलाओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के बालाजी को सौंपा। हाल ही में दिल्ली के एक रेस्त्रां में एक महिला को प्रवेश करने से इसलिए रोक दिया गया था क्योंकि उन्होंने साड़ी पहन रखी थी। वह अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्नातक संघ से जुड़ी हैं। बहरहाल, साड़ी पहनकर जाने पर रेस्त्रां में प्रवेश न मिलने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। संगठन से जुड़ी नोएडा महानगर की उपाध्यक्ष अनीता चौधरी के साथ ही संगठन की ओर से साड़ी को महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिधान घोषित करने की मांग की जा रही है। इसी क्रम में बुधवार को मेरठ, बुलंदशहर और बिजनौर में संगठन से जुड़ी पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्षम अधिकारियों को पत्रक सौंपा। मांग की गई है कि साड़ी को राष्ट्रीय परिधान घोषित करते हुए दिल्ली के उक्त रेस्त्रां के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्नातक संघ की मेरठ शाखा की जिलाध्यक्ष सपना अग्रवाल और महामंत्री ऋचा सिंह की अगुवाई में बुधवार को महिलाओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के बालाजी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से अखंड भारत की सनातनी पहचान बनाए रखने वाली साड़ी के अस्तित्व को लेकर गहरी चिंता जताई गई। कहा गया कि साड़ी न केवल भारतीय संस्कृति व परिधान परंपरा की पहचान है, वरन महिलाओं का पसंदीदा परिधान है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए साड़ी को महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिधान घोषित करने के साथ ही अभद्रता के लिए रेस्त्रां के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई। इस दौरान बबीता सोम, गीता सिंह, संगीता सिंह और श्वेता भारद्वाज आदि उपस्थित थीं। 

यजुर्वेद में मिलता है साड़ी का उल्लेख

आरजी पीजी कालेज की इतिहास विभागाध्यक्ष डा. रीनू जैन बताती हैं कि यजुर्वेद में सबसे पहले साड़ी शब्द का उल्लेख मिलता है। वहीं ऋग्वेद की संहिता के अनुसार यज्ञ, हवन और मांगलिक कार्यों में महिलाओं द्वारा साड़ी पहनने का विधान मिलता है। महाभारत काल में भी साड़ी का खूब अच्छे से वर्णन मिलता है। साड़ी ही एक ऐसा पारंपरिक परिधान है, जिसमें विभिन्न कलाओं का समावेश है। साड़ी पहनने के कई तरीके हैं जो भौगोलिक स्थिति, पारंपरिक मूल्यों और अपनी पसंद पर निर्भर करते हैं। साड़ी ने अपने दामन में हजारों बरसों का इतिहास समेट रखा है, विरासत संजो रखी है। साड़ी महज एक कपड़ा नहीं है। साड़ी हर घर की जीवंतता का प्रमाण है, अहसास है।